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डॉ. अम्बर पारे : भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान

by Yonoj News
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डॉ. अम्बर पारे : भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा एवं समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक विशिष्ट पहचान

भारतीय संस्कृति में ज्ञान, साधना, सेवा एवं लोककल्याण को सदैव सर्वोच्च आदर्शों में स्थान दिया गया है। इन्हीं मूल्यों को अपने जीवन एवं कार्य का आधार बनाकर डॉ. अम्बर पारे भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वास्थ्य शिक्षा, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग-विज्ञान तथा चेतना-विज्ञान के क्षेत्र में अध्ययन, अनुसंधान एवं जनजागरण से जुड़े हुए हैं। मध्यप्रदेश के हरदा जिले के ग्राम दुलिया से संबंधित डॉ. अम्बर पारे का कार्य भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित समग्र स्वास्थ्य दृष्टि के अध्ययन, प्रशिक्षण एवं व्यावहारिक अनुप्रयोग का एक उल्लेखनीय उदाहरण प्रस्तुत करता है।

स्वर्गीय श्री राजेन्द्र पारे के दो पुत्र हैं। उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ. अंकुर पारे शिक्षा, अनुसंधान, लेखन, सामाजिक अध्ययन एवं जनजागरण के क्षेत्र से जुड़े हुए हैं। उनकी 11 से अधिक पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं, जिन्हें पाठकों द्वारा व्यापक सराहना प्राप्त हुई है। उनके कनिष्ठ पुत्र डॉ. अम्बर पारे भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वास्थ्य शिक्षा, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग-विज्ञान एवं चेतना-विज्ञान के अध्ययन, अनुसंधान एवं जनजागरण से जुड़े हुए हैं।

डॉ. अंकुर पारे एवं डॉ. अम्बर पारे, दोनों भाइयों ने अपने-अपने कार्यक्षेत्र में अध्ययन, अनुसंधान, ज्ञान-विस्तार एवं जनजागरण को विशेष महत्व दिया है। दोनों ने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर विशिष्ट पहचान स्थापित की है तथा अपने कार्यों के माध्यम से हरदा जिला, मध्यप्रदेश एवं देश का गौरव बढ़ाया है।

डॉ. अम्बर पारे ने अपनी प्रारंभिक एवं स्कूली शिक्षा सेंट मेरीज़ को-एड स्कूल, हरदा से तथा उच्च माध्यमिक शिक्षा यूनिवर्सल एकेडमी, इंदौर से प्राप्त की। उच्च शिक्षा के अंतर्गत उन्होंने बीडीएस एवं बीएनवाईएस की उपाधियाँ प्राप्त कीं। इसके अतिरिक्त पीजीडीएचएचएम, पीजीडीसीएफटी, मास्टर इन अल्टरनेटिव मेडिसिन, पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा इन इन्फेक्शियस डिजीज तथा सर्टिफिकेट इन डायबिटीज मेलिटस सहित विभिन्न उन्नत अध्ययन एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम पूर्ण किए हैं। आधुनिक स्वास्थ्य विज्ञान एवं भारतीय स्वास्थ्य परंपराओं के समन्वित अध्ययन ने उन्हें स्वास्थ्य, जीवनशैली प्रबंधन, प्राकृतिक स्वास्थ्य एवं समग्र स्वास्थ्य संबंधी विषयों पर व्यापक दृष्टिकोण प्रदान किया है।
महायोगी स्वर्गीय गुरुदेव श्री जमुना प्रसाद चतुर्वेदी जी के सान्निध्य एवं मार्गदर्शन में डॉ. अम्बर पारे ने योग, ध्यान, प्राण-विज्ञान, चेतना-विज्ञान, साधना तथा भारतीय ज्ञान परंपरा के विविध आयामों का अध्ययन, अवलोकन एवं व्यावहारिक अनुप्रयोग किया। महाअवतार श्री बाबा जी की गुरु-परंपरा से प्रेरित इस ज्ञानधारा ने उनके चिंतन को गहराई से प्रभावित किया। भारतीय ज्ञान परंपरा, योग-विज्ञान एवं आध्यात्मिक स्वास्थ्य विज्ञान के समन्वय से विकसित इंडियन एंशिएंट साइंटिफिक स्पिरिचुअल हेल्थ सिस्टम की अवधारणा भी उनके अध्ययन एवं अनुभवों से जुड़ी हुई है।

डॉ. अम्बर पारे के अध्ययन एवं कार्यक्षेत्र में आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग चिकित्सा, हठयोग आधारित स्वास्थ्य पद्धतियाँ, प्राण चिकित्सा, मर्म चिकित्सा, मंत्र चिकित्सा, ध्यान चिकित्सा, स्वर-विज्ञान, प्राण-विज्ञान, आहार चिकित्सा, जल चिकित्सा, मृदा चिकित्सा, सूर्य चिकित्सा, पंचमहाभूत आधारित स्वास्थ्य सिद्धांत, कुण्डलिनी शक्ति जागरण, चक्र शोधन, चक्र संतुलन, सबकॉन्शियस माइंड अध्ययन, सुपरकॉन्शियस माइंड अध्ययन, कॉस्मिक एनर्जी, योग निद्रा, बैच फ्लावर थेरेपी तथा समग्र स्वास्थ्य विज्ञान के विविध आयाम शामिल हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित इन विषयों के अध्ययन, प्रशिक्षण एवं जनजागरण के माध्यम से वे स्वास्थ्य के प्रति समग्र एवं बहुआयामी दृष्टिकोण विकसित करने के प्रयासों से जुड़े हुए हैं।
ग्राम दुलिया, जिला हरदा (मध्यप्रदेश) स्थित डॉ. अम्बर पारे नेचुरोपैथी सेंटर भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, आयुर्वेद, प्राकृतिक चिकित्सा, योग-विज्ञान, स्वास्थ्य शिक्षा तथा समग्र स्वास्थ्य जागरूकता से संबंधित गतिविधियों के लिए जाना जाता है। यह केंद्र स्वास्थ्य परामर्श के साथ-साथ जीवनशैली प्रबंधन, स्वास्थ्य शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा पर आधारित समग्र स्वास्थ्य दृष्टि के प्रसार का भी कार्य करता है। देश के विभिन्न राज्यों एवं महानगरों के साथ-साथ अमेरिका, यूनाइटेड किंगडम, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी, फ्रांस, सिंगापुर, मॉरीशस, संयुक्त अरब अमीरात, कतर तथा अन्य देशों से भी लोग स्वास्थ्य परामर्श एवं मार्गदर्शन के लिए इस केंद्र से जुड़े हैं। उनके मार्गदर्शन में उपयोग की जाने वाली आयुर्वेदिक औषधियाँ एवं स्वास्थ्य संबंधी उत्पाद भारत तथा विदेशों में ऑनलाइन एवं कुरियर सेवाओं के माध्यम से भी उपलब्ध कराए जाते हैं।
डॉ. अम्बर पारे सप्ताह में केवल गुरुवार, शुक्रवार एवं शनिवार को स्वास्थ्य परामर्श प्रदान करते हैं। प्रत्येक व्यक्ति को पर्याप्त समय, विस्तृत स्वास्थ्य मूल्यांकन एवं व्यक्तिगत मार्गदर्शन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से प्रतिदिन लगभग 20 लोगों को ही परामर्श दिया जाता है। इसी कारण पूर्व अपॉइंटमेंट एवं रजिस्ट्रेशन आवश्यक रहता है।

डॉ. अम्बर पारे विभिन्न राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार, वैज्ञानिक सम्मेलनों, कार्यशालाओं, शैक्षणिक सत्रों, प्रशिक्षण कार्यक्रमों, विशेषज्ञ व्याख्यानों, स्वास्थ्य जागरूकता अभियानों एवं सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय सहभागिता करते रहे हैं। स्वास्थ्य शिक्षा, भारतीय ज्ञान परंपरा, समग्र स्वास्थ्य, चेतना-विज्ञान एवं जीवनशैली प्रबंधन से संबंधित विषयों पर उनका अध्ययन एवं जनजागरण निरंतर जारी है।
वर्ष 2019 में उन्हें विश्व की प्रतिष्ठित चिकित्सा संस्था फेलो ऑफ द रॉयल सोसाइटी ऑफ मेडिसिन (एफआरएसएम) की फैलोशिप प्राप्त हुई। इसके अतिरिक्त उन्हें वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स रिकग्निशन, जी-20 सिविल 20 सेवा समिट सम्मान, हेल्थ केयर अवार्ड तथा हेल्थ एक्सीलेंस अवार्ड सहित अनेक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय सम्मान प्राप्त हुए हैं। जी-20 सिविल 20 सेवा समिट सम्मान उन्हें तत्कालीन मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान द्वारा प्रदान किया गया, जबकि हेल्थ केयर अवार्ड मध्यप्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री द्वारा स्वास्थ्य शिक्षा, जनजागरण एवं सामाजिक योगदान के लिए प्रदान किया गया। ये सम्मान स्वास्थ्य शिक्षा एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के क्षेत्र में उनके कार्यों की औपचारिक मान्यता के रूप में देखे जाते हैं।

सामाजिक उत्तरदायित्व के अंतर्गत डॉ. अम्बर पारे गरीब, दिव्यांग एवं मजदूर वर्ग के लोगों से परामर्श शुल्क नहीं लेते हैं। स्वास्थ्य शिक्षा, जनजागरण तथा सामाजिक सरोकारों से संबंधित विभिन्न गतिविधियों में उनकी सक्रिय सहभागिता निरंतर बनी हुई है।
भारतीय प्राचीन चिकित्सा पद्धति, भारतीय ज्ञान परंपरा, स्वास्थ्य शिक्षा, चेतना-विज्ञान एवं समग्र स्वास्थ्य के क्षेत्र में डॉ. अम्बर पारे का अध्ययन, अनुसंधान एवं जनजागरण निरंतर जारी है। पारंपरिक भारतीय ज्ञान एवं आधुनिक स्वास्थ्य शिक्षा के मध्य सार्थक संवाद स्थापित करने तथा स्वास्थ्य के प्रति समग्र दृष्टिकोण विकसित करने की दिशा में उनके कार्य उल्लेखनीय माने जाते हैं।

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